किशनगंज (मोहम्मद अजीमुद्दीन)
डॉक्टर अंशु
तिवारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष ग्रामीण चिकित्सक एसो.
शिएशन ने एक विज्ञप्ति जारी कर बिहार सरकार
को निशाना बनाते हुए कहा है कि बिहार राज्य
स्वास्थ्य समिति एवं एवं राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय
के संयुक्त तत्वधान में जन स्वास्थ्य का कोर्स
कराने के बाद ग्रामीण चिकित्सकों को परेशान
कर रही है सरकार का रवैया ढुलमुल नीतियों के
कारण उनका रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है
साक्षात आज जनता को भी काफी दिक्कतों का
सामना करना पड़ रहा है क्योंकि एकमात्र गांव
में प्रशिक्षित ग्रामीण शिक्षकों पर भी निर्भर थे ।
अब पूरे भारत के ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता जग
चुके हैं और इसका जवाब पटना के गांधी मैदान
में सरकार को जवाब देना होगा अन्यथा प्रशिक्षित
ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर दंडात्मक
कार्रवाई बंद करना होगा । भोली-भाली जनता को
पता नहीं है किस बीमारी में किस डॉक्टर से
दिखाना है। प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सक प्राथमिक
उपचार करते हैं फिर भी उन्हें बदनाम किया
जाता है। अगर सरकार अति शीघ्र प्रशिक्षित एवं
गांव के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दंडात्मक
कार्रवाई से नहीं रोकते हैं तो देश में आने वाली
अनेक प्रकार के भयानक बीमारियां जिस प्रकार
करुणा में इन प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सकों को
सरकार के द्वारा ट्रीटमेंट सपोर्टर का ऑर्डर दिया
गया था। माननीय मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षित ग्रामीण
चिकित्सकों से अनुरोध किया था कि आप लोग
भी मदद करें शायद माननीय नीतीश कुमार भूल
चुके हैं कल क्या होगा कोई नहीं जानता है अगर
यह गांव के स्वास्थ्य कार्यकर्ता गांव की स्वास्थ्य
देखभाल नहीं करेंगे तो शायद श्मशान में भी
जगह नहीं मिलेगी। इसलिए सरकार को प्रशिक्षित
ग्रामीण चिकित्सकों दंडात्मक कार्रवाई से रोकना
चाहिए ताकि यही इनकी रोजी-रोटी में कोई खलल ना
हो ।

